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बेसहारा और बेजुबान जानवरों का सहारा बने युवा, खुद के खर्चे पर कर रहे उपचार


मंडी आदमपुर, 5 सितम्बर
इंसान के सबसे बेहतर और सच्चे दोस्त के तौर पर जानवर को माना जाता है। ये इंसान के ऐसे सहमत दोस्त होते हैं जो न कभी सवाल पूछते और न ही कभी आलोचना करते हैं। आज के जमाने में जहां इंसान दूसरे इंसान का बैरी है वहीं कुछ ऐसे भी युवा है जो आदमपुर क्षेत्र में इन बेसहारा जीवों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए समाज में अलख जगा रहे हैं। गांव सीसवाल निवासी वीएलडीए विनोद लटियाल पिछले 5 सालों से घायल बेजुबानों का खुद के खर्चे पर इलाज कर रहे है। विनोद ने बताया कि आपको अपने आसपास ऐसे कई जानवर घूमते मिल जाएंगे जो जख्मी होते हैं या किसी बीमारी से वो तड़प रहे होते हैं। उनके दिल में इन पशुओं के लिए टीस उभरी तो उन्होंने इनकी संभाल का बीड़ा उठाते हुए उपचार उपलब्ध कराना शुरू किया। ऐसे ही सड़कों, गलियों में घूमते लावारिस पीडि़त पशुओं को फिर से स्वस्थ करने के लिए युवा की टीम बनाई ताकि अन्य को भी इस मिशन में खुद को साबित करने का मौका मिल सकें। समाजेसवी विनोद लटियाल ने 2015 में वीएलडीए का डिप्लोमा किया। 5 साल से नि:शुल्क और युवाओं के सहयोग से सेवा उपचार कर रहे हैं। क्षेत्र में सराहनीय व सेवाभावी कार्यों के लिए कई सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैं। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन मेंं 16 जुलाई 2018 वाई फोर डी संस्था द्वारा न्यू इंडिया कॉन्क्लेव द्वारा आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। टीम में शामिल विनोद के अलावा विक्रम टाक, पवन सैनी, प्रवीण, सतीश, रवि, दिनेश शर्मा, संदीप सैनी व हर्ष इस समय मोर, नीलगाय, कुत्ते, बिल्ली, गाय अन्य बेसहारा जीवों का उपचार कर रहे हैं। आदमपुर के क्षेत्र में कहीं भी जीवों की सेवा का मौका मिले वे हमेशा तैयार रहते हैं।
इलाज के दौरान कुत्ते ने काटा
टीम में शामिल नन्हे बालक हर्ष को इलाज के दौरान कुत्ते ने काट लिया। कुत्ते के काटने के बावूजद 9वीं कक्षा के इस छात्र का हौंसला कम नही हुआ। विनोद ने बताया कि गांव सीसवाल में जाखोद खेड़ा रोड पर घायल अवस्था में कुत्ता मिलने का पता लगा। जब उपचार के लिए हर्ष को साथ लेकर गए तो कुत्ते ने हर्ष के हाथ को काट लिया। काटने के बाद भी हर्ष व विनोद ने घायल कुत्ते का उपचार किया। शनिवार को आदमपुर नागरिक अस्पताल में एंटी रैबिज टीका लगवाया। हर्ष का कहना है कि पशु-पक्षी बेशक बेजुबान हो लेकिन इनकी दुआएं इंसान की जिंदगी को खुशहाल बना देती है।

बेसहारा और बेजुबान जानवरों का सहारा बने युवा, खुद के खर्चे पर कर रहे उपचार

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