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तहसील में रजिस्ट्रियां शुरू न होने से जनता व परिसर में काम करने वालों के सामने रोजी रोटी का संकट
इनैलो ने बताया जन विरोधी फैसला


मंडी आदमपुर, 26 अगस्त
सरकार द्वारा पिछले माह से रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने से लोग बुरी तरह परेशान है वहीं तहसील परिसर में काम करने वाले स्टाम्प विक्रेता, रजिस्ट्री लेखाकार, टाइपिस्ट व उनके हैल्पर तथा ग्रामीणों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनका कहना है कि रजिस्ट्री कार्य बंद होने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है क्योंकि लाकडाऊन के चलते उन्हें पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा है एवं अब कई दिनों से रजिस्ट्रियां एवं अन्य कार्य बंद होने से उन्हें भारी परेशानी हो रही है। आदमपुर बार एशोसिएशन व ग्रामीणों ने रजिस्ट्रियां तुरन्त शुरू करने की मांग की है ताकि परेशानी से बचा जा सके। रजिस्ट्री घोटाले की आड़ में रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध लगाने पर जनविरोधी फैसला करार देते हुए इनैलो नेता राजेश गोदारा, हलका अध्यक्ष अशोक यादव व युवा अध्यक्ष वजीर ज्याणी ने कहा कि सरकार की मंशा जनता के अधिकारों को छीनने की है न कि उन्हें सुविधाएं देने की। सरकार अगर चाहे तो रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार हो ही नही सकता। सम्पत्ति खरीदना व बेचना प्रत्येक व्यक्ति का सवैंधानिक अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 300 में स्पष्ट कहा गया है कि सिर्फ किसी कार्यपालक आदेश, जिसके पीछे विधायिका द्वारा बनाए गए किसी कानून की कोई अथॉरिटी नहीं है, के द्वारा किसी व्यक्ति को उसकी परिसंपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता। संपत्ति का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है। जिस व्यक्ति ने जमीन खरीद ली वो उसे बेचेगा नही तो क्या करेगा, जनता के इस अधिकार पर यह कुठाराघात क्यों है।


भ्रष्टाचार के रास्ते खोलती है सरकार
सभी प्रकार की रजिस्ट्रियां खोलकर सरकार नियमानुसार स्टाम्प ड्यूटी लगाकर राजस्व वृद्धि करे यही सरकार का कर्तव्य है। जांच के नाम पर 22 जुलाई से रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध उचित नही है। जांच तो सिर्फ लीपापोती है, सिर्फ लॉकडाऊन के 3 महीनों में रजिस्ट्रियां बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के कर दी गई तो क्या सब नाजायज है। इनैलो नेताओं ने कहा कि सरकार एक भी रजिस्ट्री न तो रद्द कर सकती है और न ही न्यायालय में चैलेन्ज कर सकती है क्योंकि रजिस्ट्रशन अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार उचित रूप से प्रस्तुत डॉक्यूमैंट को अस्वीकार नही कर सकता, उसका कर्तव्य है कि उक्त डॉक्यूमैंट रजिस्टर करें। लीपापोती के नाम पर सरकार ने कई तहसीलदार व नायब तहसीलदार निलंबित किए है लेकिन समयानुसार सब बहाल हो जाएंगे तो फिर यह झमेला सिर्फ जनता को परेशान करने के लिए क्यों ? क्यों सरकार मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है ? उपमुख्यमंत्री महोदय की स्टेटमेंट है कि पिछले तीन वर्षों की रजिस्ट्रियों की जांच होगी, जांच तो भले ही 50 वर्षो की कर लो लेकिन इससे होगा क्या? सरकार एक भी रजिस्ट्री रद्द नही कर सकती, रजिस्ट्री रद्द करने की शक्ति सिविल न्यायालय की है और रजिस्ट्रार ने अधिनियम अनुसार अपना कर्तव्य पूरा किया है। जनहित में सभी रजिस्ट्रियां खोल देनी चाहिए ताकि जनता को उसका अधिकार वापिस मिल जाए और सरकार को राजस्व मिल सके।

काजला व न्योली कलां जलघर ने नही भरा जुर्माना
मंडी आदमपुर, 26 अगस्त
आदमपुर हलके के गांव काजला व न्योली जलघर पर नहर तोडऩे पर वर्ष 2018 में नहर विभाग द्वारा काजला को 43,740 व न्योली जलधर को 6,480 रुपए का जुर्माना लगाया गया। जिला उपायुक्त ने भी जुर्माना भरने के आदेश दिए लेकिन अभी तक जुर्माना नही भरा गया है। एक बार जिला उपायुक्त ने फिर जुर्माना भरने के आदेश दिए है जुर्माना ना भरने पर आगामी कार्यवाही की जाएगी।

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